Day: February 12, 2019

कला पर न लगे अनावश्यक प्रतिबंध (प्रभात खबर)

जगदीश रत्तनानी, वरिष्ठ पत्रकार नामचीन अभिनेता, निर्देशक तथा निर्माता अमोल पालेकर एक मृदुभाषी वक्ता हैं, पर वे एक दमदार बात रख सकते हैं. पिछले सप्ताह वे मुंबई के नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में स्वर्गीय कलाकार प्रभाकर बर्वे की एक अरसे के दौरान विकासशील कलाकृतियों की प्रदर्शनी में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित थे....

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हिंदी का बढ़ा महत्व (पत्रिका)

खाड़ी-देशों में कार्य कर रहे भारतीय कामगारों के लिए अच्छी खबर आई है। आबुधाबी सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसले में न्यायालयों में काम आने वाली भाषाओं में हिंदी को तीसरी अधिकृत भाषा के रूप में शामिल किया है। पहले वहां अरबी और अंग्रेजी भाषा में ही न्यायिक दस्तावेज तैयार होते थे। अब हिंदी के शामिल...

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सस्ती बिजली से कंपनियों को झटका (दैनिक ट्रिब्यून)

भरत झुनझुनवाला कोयले से बिजली बनाने वाली थर्मल पॉवर कम्पनियां परेशानी में हैं। बीते समय में केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में इनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए कमेटी बनायी थी। कमेटी ने कोयले से बिजली बनाने वाले 34 थर्मल प्रोजेक्टों के परेशानी में पड़ने का एक प्रमुख कारण यह बताया था कि...

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मूर्तियों की माया (दैनिक ट्रिब्यून)

वर्ष 2008 में मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी, तभी से खुद अपनी और दलित नेताओं की मूर्तियों के साथ हाथियों की करोड़ों की मूर्तियां बनवाने से विवादों में घिरी रहीं। विपक्षी पार्टियों के लिए माया की मूर्तियां हमेशा एक राजनीतिक हथियार बनती रहीं। सवाल उछलते रहे कि प्रदेश के लिए यह करोड़ों की मूर्तियां...

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निरंकुश टीका-टिप्पणियों से दबाव में कोर्ट (दैनिक ट्रिब्यून)

अनूप भटनागर उच्चतम न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सीकरी की सार्वजनिक रूप से यह स्वीकारोक्ति कि डिजिटल युग में न्यायिक प्रक्रिया दबाव में है, विषय की गंभीरता को दर्शाती है। उनका कहना था कि किसी भी मामले की सुनवाई से पहले ही लोग बहस करने लगते हैं कि क्या फैसला होना चाहिए। सोशल मीडिया...

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शराब का जहर (नवभारत टाइम्स)

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के एक सीमावर्ती गांव में किसी की मृत्यु पर तेरहवीं की रस्म के लिए इकट्ठा हुए आसपास के चार-पांच गांवों के लोग एक साथ जहरीली शराब के शिकार हो गए। संयोग यह कि ऐसी ही घटना ठीक उसी दिन उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा के पास पड़ने वाले कस्बे कुशीनगर...

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पर्यावरण- उत्पादक का उत्तरदायित्व जरूरी (राष्ट्रीय सहारा)

पंकज चतुव्रेदी भारत में हर साल कोई 4.4 खरब लीटर पानी को प्लास्टिक की बोतलों में पैक कर बेचा जाता है। यह बाजार 7040 करोड़ रुपये सालाना का है। जमीन के गर्भ से या फिर बहती धारा से प्रकृति के आशीर्वाद स्वरूप निशुल्क मिले पानी को कुछ मशीनों से गुजार कर बाजार में लागत के...

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चीन की शरारत (राष्ट्रीय सहारा)

लोकतांत्रिक भारत के पड़ोसी कम्युनिस्ट चीन ने अपनी पुरानी साम्राज्यवादी नीतियों को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के अरुणाचल प्रदेश के दौरे का यह कहते हुए विरोधजताया है कि यह विवादित इलाका है, और यहां किसी भी तरह की गतिविधि से सरहद के सवाल जटिल हो सकते हैं। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन...

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आरक्षण का दर्शन (राष्ट्रीय सहारा)

राजस्थान में आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समुदाय फिर आंदोलनरत हैं। राजस्थान सरकार सांविधानिक सीमा के कारण कोई फैसला कर पाने की स्थिति में नहीं है। आरक्षण के बारे में अब नये सिरे से विचार करने का समय आ गया है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने जाटों को ओबीसी कोटा के तहत आरक्षण देने...

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A Regressive Quota (The Indian Express)

Written by Rakshit Sonawane Though the decision of the Narendra Modi government to grant 10 per cent reservation for the general category appears to be a political gimmick to appease upper castes in an election year, it is actually a historic ploy to turn back the wheels of social justice. Assuming that it clears legal...

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