Month: February 2019

पढ़े-लिखों का साथ है खतरनाक (दैनिक ट्रिब्यून)

अभिषेक कुमार सिंह इस वक्त आतंकवाद का जो सबसे गंभीर पहलू सामने आ रहा है, वह पढ़े-लिखे युवाओं की इसमें संलिप्तता है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला करने वाला जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी आदिल अहमद डार साल भर पहले ग्यारहवीं में पढ़ता था। पिछले कुछ समय से आतंकी संगठनों में ऐसे...

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अफगान अनिश्चितता पर गौर करें (दैनिक ट्रिब्यून)

जी. पार्थसारथी इस वक्त देश का ज्यादा ध्यान आगामी लोकसभा चुनाव पर केंद्रित है। इसमें अब पुलवामा त्रासदी के बाद कड़ा जवाब देने की राष्ट्रीय दृढ़ता और जुड़ गई है। इसके अलावा हमारी विदेश नीति में जिस विषय पर सावधानीपूर्वक ध्यान देने की जरूरत है तो वह है अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी से...

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नशे का नासूर (दैनिक ट्रिब्यून)

भारत की बढ़ती हुई समस्या है— विभिन्न प्रकार के नशे के आदी और नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ठीक ही चेताया कि नशा केवल जनस्वास्थ्य ही नहीं, देश की सेहत व सुरक्षा के लिए भी बड़ा ख़तरा बन चुका है और ड्रग्स से होते हैं आतंकियों के हाथ मजबूत।...

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झुक कर बचाए साथी (नवभारत टाइम्स)

लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के तालमेल में बीजेपी अपने सहयोगी दलों के प्रति काफी उदार रुख अपना रही है। बिहार में जेडीयू के सामने पूरी तरह झुक जाने के बाद उसने महाराष्ट्र में शिवसेना से समझौते में भी काफी लचीला रुख अपनाया है। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि बीजेपी की नजर में...

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रिश्तों के दायरे (नवभारत टाइम्स)

सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की भारत यात्रा ऐसे समय हुई, जब पूरा देश पुलवामा अटैक को लेकर शोकाकुल है। संयोग से युवराज पहले पाकिस्तान गए थे लेकिन भारत की आपत्ति का ध्यान रखते हुए वह सीधे पाकिस्तान से भारत नहीं आए बल्कि अपने देश जाकर वापस इस तरफ लौटे। इससे एक बात...

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सभी खेलों का करें बहिष्कार (राष्ट्रीय सहारा)

मनोज चतुव्रेदी भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध कभी सामान्य नहीं रहे हैं। इसकी वजह पाक द्वारा प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियां हैं। जब भी दोनों देशों के बीच संबंध सुधरते दिखते हैं, तब ही कोई बड़ी आतंकवादी घटना माहौल को और खराब कर देती है। इन खराब संबंधों का प्रभाव खेलों पर भी पड़ता है। पिछले...

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नहीं रहे विमर्शकार नामवर (राष्ट्रीय सहारा)

जिस दिन खबर लगी कि नामवर सिंह एम्स में वेंटीलेटर पर हैं, तभी से लग रहा था कि अब हम उनके विदा होने का ही इंतजार कर सकते हैं। वह लौट कर घर भी आए और आज आखिरकार चले गए। नामवर ने अपनी ‘‘सैय्यद’ जैसी मेहनत और अभूतपूर्व मेधा के बल पर हिंदी साहित्य पर...

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एक ’मास्टर‘‘ चला गया (राष्ट्रीय सहारा)

जगदीश्वर चतुव्रेदी नामवरजी की खूबी रही कि वे अपने निजी जीवन को निजी रखते थे और उसको कभी सार्वजनिक बहस में नहीं आने देते थे। निजी के वे ही पहलू सामने आते हैं, जो सार्वजनिक कर्म का हिस्सा रहे हैं। निजी और पब्लिक में नामवरजी का यह संतुलन देखने योग्य था। नामवरजी ने बड़े ही...

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Namvar Singh defined the contours of Hindu literary culture (The Indian Express)

Written by Apoorvanand The most brilliant mind of our literary world is no more. The death of Hindi literary critic Namvar Singh truly marks the end of an era. What was this era? It was defined by the excitement of creation and an eagerness to sincerely engage with it. It can, therefore, be called a...

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Any terror attack traceable to Pakistan undercuts its economic stability, IMF deal (The Indian Express)

Written by Rani D Mullen, Duvvuri Subbarao Is it possible that Pakistan has scored a self-goal by allegedly sponsoring last week’s terrorist attack on Indian security forces in Pulwama, Jammu & Kashmir which took over 40 lives? Since the Pakistan-based terrorist group Jaish-e-Mohammad (JeM) has claimed responsibility for the attack, India has vowed to work...

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