Day: January 5, 2019

यह है ‘भारत देश हमारा’ (पंजाब केसरी)

किसी समय हमारी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और उच्च संस्कारों के चलते समस्त विश्व मार्गदर्शन के लिए भारतीय गुरुओं की शरण में आने में गर्व अनुभव करता था परंतु आज हम अपने उच्च संस्कारों, मान्यताओं व मर्यादाओं से किस कदर दूर हो गए हैं, यह मात्र एक महीने की निम्र ताजा घटनाओं से स्पष्ट है :  07 दिसम्बर...

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सबसे अलग क्यों हैं माइक ब्रेयरली (हिन्दुस्तान)

रामचंद्र गुहा प्रसिद्ध इतिहासकार ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज रोडनी हॉग इंग्लैंड के क्रिकेट कप्तान माइक बे्रयरली के बारे में अक्सर कहा कहते थे- ‘उनके पास लोगों की डिग्री’ यानी जनता का प्यार है। दोनों के क्रिकेट से संन्यास लेने के काफी दिनों बाद हॉग ने माइक को एक रेडियो शो में बुलाया था। हॉग ने माइक...

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हादसों के उद्योग (जनसत्ता)

राजधानी दिल्ली के मोतीनगर इलाके में एक फैक्टरी में हुआ हादसा और उसमें सात लोगों की मौत से एक बार फिर यही साफ हुआ है कि नियम-कायदों को ताक पर रख कर कैसे औद्योगिक इकाइयों का संचालन हो रहा है और वहां लोगों की जान की कोई कीमत शायद नहीं है। वरना यह कैसे संभव...

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खुदकुशी और सबक (जनसत्ता)

जवाहर नवोदय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की आत्महत्या के मामले में अगर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख नहीं अपनाया होता तो शायद सरकार की आंखें नहीं खुलतीं। न ही देश को पता चलता कि ग्रामीण प्रतिभाओं को सामने लाने के मकसद से शुरू किए गए ये विद्यालय अब जितने शिक्षा के केंद्र हैं, शायद उतने...

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सांसदों का निलंबन (राष्ट्रीय सहारा)

संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है। इसे लोकतंत्र का मंदिर भी कहा जाता है। यहां वाद-विवाद और संवाद के माध्यम से समस्याओं का निराकरण किया जाता है, लेकिन कुछ दशकों से यह बौद्धिक वाद-विवाद और संवाद की जगह हल्ला-गुल्ला और हंगामा का स्थल बनता जा रहा है। संसदीय मर्यादाओं की अवहेलना करने वाली यह दुष्प्रवृत्ति...

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सदियों तक दिखेगा असर (राष्ट्रीय सहारा)

कोटा नीलिमा सबरीमाला मंदिर विवाद आज के दौर में एक स्वतंत्र देश के लोगों के औपनिवेशिकरण का द्योतक है। आजादी के आधे हिस्से का दमन और आधे का मनभावन है। महिलाओं के आगे बढ़ने के मौकों का हरण करने और पुरु षों को सुखद अहसास कराने वाला है। यह औपनिवेशकों की भांति आचरण करने वाले...

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No Sir We Are Not Sheep Sir (TOI)

Nobody, students or adults, wants patriotism to be forced down their throatsPavan K Varma As the sun set on the outgoing year, the Gujarat government decided that it was time to further the cause of patriotic fervour. The command came in the form of an official circular from the state secondary and higher secondary education...

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शिक्षकों को राहत (दैनिक ट्रिब्यून)

पंजाब के स्कूली शिक्षकों व छात्रों पर तबादलों का हौवा हमेशा हावी रहा है। पंजाब कैबिनेट ने लंबे समय से प्रतीक्षित शिक्षक स्थानांतरण नीति को मंजूरी दे दी है। बस शर्त यही है कि शिक्षक को किसी शिकायत का सामना न करना पड़े या उसका प्रदर्शन खराब न हो। अब एक शिक्षक मोटे तौर पर...

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शक्तिशाली हसीना और बेदम विपक्ष (दैनिक ट्रिब्यून)

पुष्परंजन नियंत्रित था यह आम चुनाव। विपक्षी प्रत्याशियों को कितने वोट से निपटा देना है, यह सब भी शायद योजनाबद्ध तरीके से बांग्लादेश में किया गया। शाह हुसैन इमाम अमेरिका की ईस्ट-वेस्ट यूनिवर्सिटी में हैं। कभी बांग्लादेश के नामी-गिरामी अखबार ‘डेली स्टार’ के संपादक हुआ करते थे। उन्होंने 30 दिसंबर, 2018 को हुए चुनाव परिणाम...

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सुहावने होते हैं दूर के रिटर्न (दैनिक ट्रिब्यून)

आलोक पुराणिक वर्ष 2018 बीत गया, पर कई निवेशकों के लिए यह साल अच्छा न गुजरा। छोटे निवेशकों को तो सीधे शेयरों में निवेश से बचना चाहिए। शेयरों में निवेश के लिए बहुत समय, ऊर्जा और कौशल की जरूरत होती है। छोटे निवेशक से यह उम्मीद आम तौर पर नहीं होती कि वह यह सब...

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