Day: January 2, 2019

‘जहर’ भरा जीवन (पत्रिका)

कुछ दिन पहले एक खबर आई थी कि नवजात शिशुओं के साबुन-पाउडर बनाने वाली एक बहुत पुरानी, प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के उत्पाद में कैंसर को बढ़ावा देने वाले तत्त्व हैं। उसी समाचार में यह भी था कि इस बात का पता पिछले ६० साल से सबको है, बनाने वालों को भी और बेचने वालों को...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

अहम सवाल: अबकी बार-किसकी सरकार (पत्रिका)

अनंत मिश्रा हर चुनाव से पहले उठने वाला ‘यक्ष प्रश्न’ एक बार फिर से देश के सामने खड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ राजनीतिक दलों, राजनेताओं के अलावा आम जनता भी इस सवाल का जवाब जानना चाहती है कि आखिर ‘अबकी बार-किसकी सरकार।‘ हर बार की तरह देश का मिजाज जानने का दावा करने वाली...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

सत्ताधारियों से परिणाम की अपेक्षा (पत्रिका)

आलोक मेहता, वरिष्ठ पत्रकार चुनावी मौसम में वही बादल, बिजली, इन्द्रधनुष का खेल। मतदाताओं का मन मोर बादलों की भागदौड़ से नाचने लगता है। नए साल में खुशियों की बरसात की उम्मीदें जगा रहा है। निश्चित रूप से राजनीतिक दलों को ‘जादुई मंत्र’ तलाशने पड़ रहे हैं। अब घिसे-पिटे फार्मूले नहीं चल सकते हैं। लोकतंत्र...

This content is for Half-yearly Subscription, Yearly Subscription and Monthly Subscription members only.
Log In Register

ताजा नतीजों के आधार पर आकलन सही नहीं (पत्रिका)

नीरजा चौधरीराजनीतिक विश्लेषक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों के आधार पर यदि यह कहा जाए कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम भी इसी तरह से रहने वाले हैं, यह बिल्कुल ही गलत होगा। इस बात में कोई संदेह नहीं कि यहां कांग्रेस ने बाजी जीती जरूर है लेकिन...

This content is for Half-yearly Subscription, Yearly Subscription and Monthly Subscription members only.
Log In Register

शांति की ओर (पत्रिका)

हर सुबह जैसे हमें एक नई ऊर्जा से भर जाती है, ठीक वैसे ही हर नया वर्ष हमें अनायास हर्ष से भर देता है। पूरी दुनिया में आधिकारिक रूप से मान्य ग्रेगोरियन कलेंडर हमें 2019 में ले आया है, स्वागत है। शुभकामना कीजिए कि यह सुशासन और शांति का वर्ष हो। जिस भी देश में...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

छुड़ा दो छक्के (पत्रिका)

नव वर्ष की मंगल कामनाएं! नेताओं के पांवों में १७वीं लोकसभा के चुनावों के घुंघरू बंधने लग गए हैं। सन् १९५२ से अब तक १६ बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। कौन जीता, कौन हारा, किसने क्या किया-न किया, किसको याद है! मतदाता अधिकांशत: जाति-धर्म से बंधकर चल रहा था। किस जाति या धर्म का...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

देश में लटकते आ रहे मुकद्दमों की भरमार अधीनस्थ अदालतों में मुकद्दमे निपटाने में लग जाएंगे 324 वर्ष (पंजाब केसरी)

लम्बे समय से भारतीय अदालतों में जजों की अत्यधिक कमी चली आ रही है। इस समय देश में 6160 से अधिक जजों के पद खाली हैं तथा देश में 10 लाख की जनसंख्या पर सिर्फ 19.46 जज हैं। इस समय निचली अदालतों में 5748, 24 हाईकोर्टों में 406 और सुप्रीमकोर्ट में 6 जजों के पद खाली...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

अपराध बदल रहे हैं, पुलिस नहीं (हिन्दुस्तान)

विभूति नारायण राय, पूर्व आईपीएस अधिकार एक महीने में उत्तर प्रदेश जैसे बडे़ राज्य में दो पुलिसकर्मियों की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या भारतीय समाज में बढ़ रही हिंसा की प्रवृत्ति का द्योतक तो है ही, इसके पीछे कहीं न कहीं तंत्र की वह विफलता भी छिपी है, जो आधुनिक जरूरतों पर खरा उतरने में समर्थ...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

बेलगाम अपराध (जनसत्ता)

उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले किस कदर बढ़े हुए हैं, इसकी खबरें अब अक्सर सामने आने लगी हैं। लेकिन देवरिया जेल में बंद राज्य के एक माफिया सरगना अतीक अहमद की दबंगई की जो खबर आई है, वह हैरान करने वाली है। पूर्व सांसद अतीक अहमद को कई आरोपों के तहत जेल में रखा...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register

मुंहतोड़ जवाब (जनसत्ता)

नए साल से ठीक पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तानी हमले की साजिश नाकाम तो कर दी, लेकिन इससे एक बात साफ हो गई है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाला। नए साल का मौका दोनों देशों के बीच एक अच्छी शुरुआत के लिए हो सकता था, लेकिन इस अवसर को भी उसने...

This content is for Monthly Subscription, Half-yearly Subscription and Yearly Subscription members only.
Log In Register