Month: December 2018

अराजकता की आग (पत्रिका)

देश में यह क्या हो रहा है। जहां असहिष्णुता का कोई स्थान नहीं था, वहीं इतनी अराजकता! साल-दर-साल लोगों में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। कानून का राज जैसे किताबी बात हो गया। जो भारत अपनी धर्मनिरपेक्षता, साम्प्रदायिक सद्भाव और आत्मीय भाव के लिए पूरे विश्व में जाना जाता था, वही आज अराजकता...

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राजनीति का एजेंडा बदलने में कामयाब हुआ अनाम किसान (पत्रिका)

विष्णु नागर, वरिष्ठ पत्रकार इस साल के सबसे बड़े ‘न्यूजमेकर’ तो भारत के लाखों अनाम किसान हैं, जिन्होंने बहुत सहा है मगर पहली बार राजनीति का एजेंडा बदलने की सफल कोशिश की। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत इसका प्रमाण है। किसानों के मुद्दे को यहां तक पहुंचाने का श्रेय वामपंथी दलों के...

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खेती का मर्ज (पत्रिका)

वोट की मजबूरी जो न कराए कम है। पूरे देश में किसान सभी दलों के फोकस में नजर आ रहा है। बीते कई वर्षों की पीड़ा, इस साल किसान आंदोलनों की ताकत और हालिया विधानसभा चुनावों में कृषक समुदाय का फैसला देखने के बाद कोई भी पार्टी इन्हें नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती।...

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विश्व के 15 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में (पंजाब केसरी)

पांच साल तक के छोटे बच्चों का दिल्ली की अत्यधिक प्रदूषित वायु से अपने फेफड़ों की सुरक्षा के लिए मास्क पहन कर स्कूल जाना पुरानी खबर है।  अस्थमा तथा अन्य श्वसन समस्याओं से बीमार बच्चों से अस्पतालों का भर जाना, घर में बंद रहने को मजबूर हो जाना, बाहर खेलने न जाने की सलाह दिया...

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अपराधों और बलात्कारों के बाद अब अवैध हथियारों की राजधानी बनी दिल्ली (पंजाब केसरी)

दिल्ली देश की राजनीतिक राजधानी होने के साथ-साथ अपराधों और बलात्कारों के बाद अब अवैध हथियारों की राजधानी भी बनती जा रही है। और यहां अवैध हथियारों की बरामदगी में लगातार वृद्धि हो रही है।  बरामद किए गए हथियारों की बड़ी मात्रा को देखते हुए हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजैंसी एवं दिल्ली पुलिस द्वारा...

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असहिष्णुता भी और समारोहप्रियता भी (हिन्दुस्तान)

प्रियदर्शन टेलीविजन पत्रकार क्या इत्तिफाक है कि साल के आखिरी हफ्ते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के बारे में संजय बारू की किताब द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर बनी फिल्म को लेकर कांग्रेस के कुछ नेता सवाल उठा रहे हैं, तो साल के बिल्कुल शुरू में पद्मावत को लेकर बीजेपी के नेताओं ने हंगामा...

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2018 के पदचिह्न और प्रश्न (हिन्दुस्तान)

शशि शेखर आप अगर गुजरते 2018 के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर नजर डालें, तो पाएंगे कि इस साल ने सभी को कुछ दिया और सभी से कुछ लिया। संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र की यही खूबी है कि वह अपनी विविधताओं और विरूपताओं के साथ झूमता हुआ आगे बढ़ता जाता है। उसकी गतिविधियों का...

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उम्मीद के कदम (जनसत्ता)

पिछली आधी सदी में मानव ने अंतरिक्ष में जिस तरह से छंलाग लगाई है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। चांद पर मानव के कदम और धरती से दूसरे ग्रहों को भेजे गए अंतरिक्ष यान मिशनों की कामयाबी बड़ी उपलब्धियां इसलिए भी हैं क्योंकि यह सब कुछ बीसवीं सदी में ही संभव हुआ है।...

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अपराध और सजा (जनसत्ता)

शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब नाबालिग बच्चों के यौन उत्पीड़न की खबरें न आती हों। छोटी बच्चियां और कम उम्र के बालक आए दिन दंरिंदगी का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए इस साल अप्रैल में सरकार ने कठोर कानूनी उपाय किए थे। इस दिशा में बड़ा...

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Why let science disrupt a party (Hindustan Times)

As the Earth completes its journey around the sun, ready to embark once more on its annual trip, people around the world are preparing to celebrate the beginning of another new year. However, the date January 1 is the new year only according to the Gregorian calendar, which was first introduced in October 1582. While...

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