Category: हिन्दी संपादकीय

भविष्य की ऊर्जा (दैनिक ट्रिब्यून)

प्रदीप कुमार मानव विकास के लिए अधिकाधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। बिजली पर हमारी बढ़ती निर्भरता के कारण भविष्य में ऊर्जा व्यय और भी बढ़ेगा। तो इतनी ऊर्जा आएगी कहां से? सब जानते हैं कि धरती पर कोयले और पेट्रोलियम के भंडार सीमित हैं, ये भंडार ज्यादा दिनों तक हमारी ऊर्जा जरूरतों को पूरा...

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समरसता के अहसासों पर तंग नजरिया (दैनिक ट्रिब्यून)

क्षमा शर्मा जब भी कोई त्योहार का उत्सव आता है, लोग उससे जोड़कर अपने-अपने उत्पाद या प्रोडक्ट को बेचने की जुगत भिड़ाते हैं। त्योहार की शुभकामनाएं और बधाई देकर वे आम ग्राहक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जिससे कि उनका माल ज्यादा से ज्यादा बिक सके। होली आ रही है। हाल ही में एक...

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लक्ष्य के सुख की कल्पना से राह आसान (दैनिक ट्रिब्यून)

शिवेंद्र प्रताप सिंह क्या आपने कभी सोचा है कि अनंत आकाश में उड़ने वाला एक पक्षी जो ज़मीन पर पड़े मांस के एक छोटे से टुकड़े को देख लेता है लेकिन वही पक्षी शिकारी के द्वारा बिछाए गए बड़े से जाल को नहीं देख पाता। अगर आप बारीकी से समझेंगे तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं...

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सबके लिए सुख (नवभारत टाइम्स)

आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने दानशीलता और परोपकारिता का एक और बड़ा उदाहरण पेश करते हुए सबका दिल जीत लिया है। पिछले दिनों उन्होंने विप्रो के अपने लगभग 34 फीसदी शेयर यानी करीब 52,750 करोड़ रुपए अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दान करने की घोषणा कर दी। इतना ही नहीं, प्रेमजी ने विप्रो...

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चीन पर दबाव (राष्ट्रीय सहारा)

भारत के लिए यह खबर निश्चय ही उत्साहवर्धक है कि मसूद अजहर को नियंतण्र आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव में अड़ंगा लगाने वाले चीन के साथ प्रमुख देश बातचीत कर रहे हैं। प्रस्ताव पेश करने वाले तीनों देश अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब चीन के साथ गहन सद्भावना वार्ता कर रहे हैं, ताकि अजहर को...

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आयोग का परामर्श (राष्ट्रीय सहारा)

चुनाव आयोग का राजनीतिक दलों से चुनाव अभियान में सैनिकों और सैन्य अभियानों की तस्वीर का इस्तेमाल करने से बचने का आग्रह स्वाभाविक है। सामान्य तौर पर विचार करने से ही लगता है कि सैनिकों का राजनीतिक दलों से कोई लेना-देना नहीं। जवानों के बलिदानों या सैन्य अभियानों को राजनीतिक मोर्चाबंदी से दूर रखा जाना...

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बेरोजगारी, बेकल करते आंकड़े (राष्ट्रीय सहारा)

रविशंकर धानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 लोक सभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार दिया जाएगा। किन्तु चुनाव के बाद की स्थितियां स्पष्ट करती हैं कि उनका रोजगार संबंधी वादा दूर-दूर तक पूरा नहीं हुआ है। अब जबकि उनका कार्यकाल खत्म होने को...

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नये किस्म का क्रूसेड्स (राष्ट्रीय सहारा)

न्यूजीलैंड जैसा देश, जहां हिंसा की घटना वर्षो से अपवाद रही हो, अचानक किसी मजहबी स्थल पर खून की होली खेली जाए, सरकार, पुलिस और आम नागरिक की क्या मानसिक दशा होगी, इसका अनुमान ही लगाया जा सकता है। ‘‘ग्लोबल पीस इंडेक्स’ यानी ‘‘नियंतण्र शांति सूचकांक’ में न्यूजीलैंड 2017 एवं 2018 में दुनिया का दूसरा...

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आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘विलेन’ बन रहा है चीन, गुस्से में भारत (दैनिक जागरण)

[पीयूष द्विवेदी]। बीते कुछ वर्षों के दौरान जम्मू कश्मीर के अलावा देश के अनेक हिस्सों में हुए अनेक आतंकवादी हमलों में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का नाम प्रमुखता से सामने आया है। इस संगठन का नेतृत्व करने वाले मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की राह में...

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राजनीतिक दलों को लोक सभा चुनाव ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ की रक्षा के नाम पर लड़ना चाहिए (दैनिक जागरण)

[ अश्विनी कुमार ]: निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव तिथियों की घोषणा के साथ ही 17वीं लोकसभा के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक बार फिर स्वयं को साबित करने जा रहा है जहां दस लाख से अधिक बूथों पर तकरीबन 90 करोड़ मतदाता नई सरकार चुनने के लिए मतदान...

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