Category: इसे भी जानें

‘उत्तम क्षमा’ के समावेश से अभिमान का पराभव (दैनिक ट्रिब्यून)

योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ आज हम सब जाने क्यों, संस्कारों से दूर होकर भौतिकता के जाल में फंसते जा रहे हैं। भौतिकता का ऐसा बुरा प्रभाव हमारे आचरण और चिंतन पर पड़ता जा रहा है कि हमारे भीतर की सहनशीलता के साथ-साथ हमारी विनम्रता भी धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। हमारे भीतर अभिमान का...

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कमजोर पड़ा देश का सबसे सक्षम हथियार (बिजनेस स्टैंडर्ड)

शेखर गुप्ता देश इस समय बढ़ते रणनीतिक खतरे का सामना कर रहा है। यह खतरा नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान द्वारा नई ब्रिगेड तैनात करने या उसके किसी मिसाइल परीक्षण से जुड़ा नहीं है। न ही यह चीन द्वारा किसी तरह की नई घुसपैठ है। यह खतरा तीन तरह का नहीं है। यह न तो सैन्य...

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हमारी याद आएगी: जब मूंछों के दम पर महफिल लूट ली (जनसत्ता)

गणेशनंदन तिवारी मेकअप फिल्मों का अभिन्न हिस्सा है और कलाकारों को ज्यादातर उस पर निर्भर रहना पड़ता है। आज तो कलाकार बिना मेकअप कैमरे के सामने खड़े होने की कल्पना भी नहीं कर सकते। मगर कन्हैयालाल को महबूब खान निर्देशित ‘औरत’ (1940) में सुक्खीलाला की भूमिका बिना मेकअप के करनी पड़ी थी। फिल्म की निर्माता...

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वर्षा एक स्पर्श, एक अनुभूति है (अमर उजाला)

परिचय दास जीवन सुंदरता से भरा है! भौंरे, मधुमक्खी, छोटे बच्चे और मुस्कराते हुए चेहरों को देखें। वर्षा और हवा को महसूस करें। जब वर्षा आरंभ होती है, तो कुछ लोग वर्षा को महसूस करते हैं। दूसरे सहते हैं। वर्षा! जिसके नरम वास्तुशिल्पीय हाथों में पत्थरों को काटने की शक्ति है और भव्यता के पहाड़ों...

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ट्रंप के कश्मीर राग का राज ( हिन्दुस्तान)

शशांक, पूर्व विदेश सचिव  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर का जिक्र यूं ही नहीं किया। वह इससे कई निशाने साधना चाहते हैं। ऊपरी तौर पर यही लगता है कि पाकिस्तान को खुश करने के लिए यह कहा गया है। मगर इसका निहितार्थ अमेरिकी चुनाव...

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बजट मुक्त भारत की ओर (दैनिक ट्रिब्यून)

आलोक पुराणिक हाल में आये बजट पर आम जनता में घणे सवाल उठे हैं। कई तरह की जिज्ञासाएं सामने आयी हैं। इन सारे सवालों और जिज्ञासाओं के जवाब के लिए चालू इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड फाइनेंस स्टडीज ने बजट प्रश्नोत्तरी जारी की है। बजट प्रश्नोत्तरी के कतिपय मुख्य अंश इस प्रकार हैं- सवाल-क्या हम सारे बजट...

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शांति की दिशा में (नवभारत टाइम्स)

अफगानिस्तान सरकार, तालिबान और अफगान समाज के कुछ अन्य प्रतिनिधियों में अपने देश के भविष्य का एक खाका तैयार करने पर सहमति बन गई है। तालिबान हिंसात्मक गतिविधियां कम करने के लिए राजी हो गए हैं। कतर की राजधानी दोहा में हुई दो दिवसीय वार्ता के बाद मंगलवार को एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया...

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Sebi cracks the whip on mutual funds (The Economic Times)

Capital markets regulator Sebi’s attempt to improve prudential regulation that includes tighter investment rules for debt mutual funds and stricter disclosure for promoters’ share pledges is welcome. The idea is to make these schemes more secure, particularly after the IL&FS default that exposed the vulnerability of non-banking financial companies (NBFCs). The new rules mandate liquid...

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लोकसभा चुनाव में हार के लिए अपने साथ-साथ नेताओं को भी जिम्मेदार मान रहे हैं राहुल गांधी (दैनिक जागरण)

राहुल गांधी की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश किए जाने के एक माह बाद भी यह जानना कठिन है कि पार्टी में क्या हो रहा है और उसका नेतृत्व कौन संभालने वाला है? राहुल गांधी एक ओर यह कह रहे हैं कि वह अपने फैसले पर अडिग हैं और दूसरी ओर...

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हिंदी-उर्दू की अजब-गजब कथा (प्रभात खबर)

मृणाल पांडे ग्रुप सीनियर एडिटोरियल एडवाइजर, नेशनल हेराल्ड हमारे राज, समाज और सोशल मीडिया पर इन दिनों उर्दू को जबरन सिर्फ मुसलमानों की भाषा मनवाने और हिंदी से सभी फारसी-अरबी मूल के शब्द हटा कर उसका ‘शुद्धीकरण’ करने की एक नादान मुहिम चलायी जा रही है. उसे देख कर एक कहानी याद आ गयी. पुराणों...

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