Category: इसे भी जानें

बजट मुक्त भारत की ओर (दैनिक ट्रिब्यून)

आलोक पुराणिक हाल में आये बजट पर आम जनता में घणे सवाल उठे हैं। कई तरह की जिज्ञासाएं सामने आयी हैं। इन सारे सवालों और जिज्ञासाओं के जवाब के लिए चालू इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड फाइनेंस स्टडीज ने बजट प्रश्नोत्तरी जारी की है। बजट प्रश्नोत्तरी के कतिपय मुख्य अंश इस प्रकार हैं- सवाल-क्या हम सारे बजट...

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शांति की दिशा में (नवभारत टाइम्स)

अफगानिस्तान सरकार, तालिबान और अफगान समाज के कुछ अन्य प्रतिनिधियों में अपने देश के भविष्य का एक खाका तैयार करने पर सहमति बन गई है। तालिबान हिंसात्मक गतिविधियां कम करने के लिए राजी हो गए हैं। कतर की राजधानी दोहा में हुई दो दिवसीय वार्ता के बाद मंगलवार को एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया...

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Sebi cracks the whip on mutual funds (The Economic Times)

Capital markets regulator Sebi’s attempt to improve prudential regulation that includes tighter investment rules for debt mutual funds and stricter disclosure for promoters’ share pledges is welcome. The idea is to make these schemes more secure, particularly after the IL&FS default that exposed the vulnerability of non-banking financial companies (NBFCs). The new rules mandate liquid...

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लोकसभा चुनाव में हार के लिए अपने साथ-साथ नेताओं को भी जिम्मेदार मान रहे हैं राहुल गांधी (दैनिक जागरण)

राहुल गांधी की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश किए जाने के एक माह बाद भी यह जानना कठिन है कि पार्टी में क्या हो रहा है और उसका नेतृत्व कौन संभालने वाला है? राहुल गांधी एक ओर यह कह रहे हैं कि वह अपने फैसले पर अडिग हैं और दूसरी ओर...

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हिंदी-उर्दू की अजब-गजब कथा (प्रभात खबर)

मृणाल पांडे ग्रुप सीनियर एडिटोरियल एडवाइजर, नेशनल हेराल्ड हमारे राज, समाज और सोशल मीडिया पर इन दिनों उर्दू को जबरन सिर्फ मुसलमानों की भाषा मनवाने और हिंदी से सभी फारसी-अरबी मूल के शब्द हटा कर उसका ‘शुद्धीकरण’ करने की एक नादान मुहिम चलायी जा रही है. उसे देख कर एक कहानी याद आ गयी. पुराणों...

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गरीबी का वायरस और चमकी बुखार (हिन्दुस्तान)

विनोद बंधु वरिष्ठ पत्रकार, हिन्दुस्तान, पटना बिहार के तिरहुत प्रमंडल में पांच साल बाद एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार का प्रेत फिर से जाग उठा है। बीते एक पखवाडे़ में इससे सवा सौ से अधिक बच्चों की सांसें थम चुकी हैं। करीब चार सौ बच्चे अस्पतालों में भर्ती कराए गए। मरीजों का आना...

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चुनाव नतीजे और नीतीश कुमार फैक्टर (प्रभात खबर)

केसी त्यागी राष्ट्रीय प्रवक्ता, जदयू लोकसभा चुनावों में बिहार के नतीजों ने सबको आश्चर्यचकित किया है. कई धारणाएं, पूर्वानुमान तथा राजनीतिक पंडितों के आंकड़े एक बार पुन: गलत साबित हुए हैं. सबसे अधिक चौंकानेवाली दो घटनाएं हैं. पहली, जदयू और इसके नेता नीतीश कुमार की बढ़ती स्वीकार्यता और दूसरी आरजेडी में उत्तराधिकार का असफल प्रयोग...

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बीमार चिकित्सा तंत्र में हड़ताल ( हिन्दुस्तान)

विभूति नारायण राय, पूर्व आईपीएस अधिकारी पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ दिनों से डॉक्टरों के साथ जो कुछ हो रहा है, वह तो देश के किसी हिस्से में कभी भी हो सकता है या कमोबेश हर जगह होता रहा है। राजधानी दिल्ली समेत अलग-अलग शहरों में सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज के दौरान किसी...

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रोजगार पैदा करने का कौशल (अमर उजाला)

जयंतीलाल भंडारी केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के श्रमबल के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही है। कई आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि देश में बेरोजगारी की दर 45 साल में सर्वाधिक है। ऐसे में पांच जून को रोजगार में कमी की चुनौती से निपटने के...

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मंत्री से सांसद बने नेताओं की जाने वाली है चौधराहट, उधर चुनाव हारने वालों का बचा मंत्री पद (दैनिक जागरण)

राज्यनामा [उत्तर प्रदेश]। भगवा पार्टी ने मंत्री जी को दूसरे जिले की सीट पर उनकी बिरादरी की बहुलता के चलते चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन, मंत्री जी करिश्मा नहीं कर पाए। मंत्रिमंडल के उनके बाकी साथी चुनाव जीत गये तो उन पर तोहमत अलग लगी कि उनके विभाग में भ्रष्टाचार का असर चुनाव परिणाम...

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