लीक के पार (हिन्दुस्तान)


साहबजादे तानसेन बनने पर तुले हुए हैं। यह तो होता नहीं कि पुश्तों से चल रहा जमा-जमाया बिजनेस संभालें’, उन्होंने खीजते हुए कहा। उनकी बात सुनकर एक शेर याद आ गया- पत्थर कितने बरसे हम पर/ जब दुनिया को हट कर देखा। हममें से ज्यादातर लोग न सिर्फ खुद ‘एक ही ढर्रे पर’ ताउम्र चलते…


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Updated: December 29, 2016 — 10:20 AM