संपादकीय: पारदर्शिता का तकाजा (जनसत्ता)


देश का लोकतंत्र इसलिए अब तक मजबूत हो सका है कि यहां न केवल सहमति-असहमति के लिए पर्याप्त गुंजाइश है, बल्कि सम्मानजनक जगह है। इससे भी अच्छी बात यह है कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाली अमूमन सभी संस्थाएं अपने कामकाज को लेकर पारदर्शिता बरतती हैं और आम अवाम को उनके फैसलों और उसकी प्रक्रिया…


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Updated: May 13, 2019 — 6:34 PM