विरोध के लिए बेतुके तर्क (दैनिक जागरण)


देश में अभी भी नोटबंदी चर्चा का एक मात्र विषय है। जो लाइन में लगे हैं वे शांत हैं, पर अर्थशास्त्री इस विषय पर अर्थशास्त्र से ज्यादा राजनीति की भाषा बोल रहे हैं। समर्थन करने वाले सब कुछ अच्छा बता रहे हैं और विरोध करने वालों की मानें तो देश रसातल में जा चुका है।…


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Updated: December 15, 2016 — 9:38 AM