संकट के साथ (जनसत्ता)

लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का वैचारिक विरोध और कई बार एक-दूसरे के खिलाफ तल्ख हो जाना स्वाभाविक बात है। अगर ये मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप जनहित के मुद्दों के आधार पर चलता रहते हैं, तो इससे लोकतंत्र समृद्ध ही होता और आखिरकार देश की बुनियाद मजबूत होती है। मगर कई बार ऐसे हालात भी सामने आ…

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Updated: March 1, 2019 — 5:12 AM