शुभेच्छा की भाषा का नहीं कोई धर्म (दैनिक ट्रिब्यून)


विश्वनाथ सचदेव कुछ अर्सा पहले किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के एक कार्यक्रम में जाने का अवसर मिला था। जानकर सुखद आश्चर्य हुआ था कि उस बैंक के सारे कर्मचारी रोज़ सुबह काम की शुरुआत से पहले सामूहिक प्रार्थना में भाग लेते हैं। कर्मचारियों में लगभग सभी धर्मों को मानने वालों की उपस्थिति की संभावना को देखते…


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Updated: January 31, 2019 — 6:49 am