पत्थरबाजी से आहत लोकतंत्र (दैनिक ट्रिब्यून)


सहीराम कायदे से तो यह पतंगबाजी के दिन हैं और भले ही लोग न कर रहे हों पर नेता लोग पतंगबाजी कर भी खूब रहे हैं। जैसे लोगों को अपनी रोजी-रोटी से फुरसत नहीं, वैसे ही नेताओं को पतंगबाजी से फुसरत नहीं। वे एक-दूसरे की डोर काटने में लगे हैं। जनता की जीवनडोर ऊपरवाला काट…


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Updated: January 28, 2019 — 12:26 PM