जब कहने को कुछ न हो (हिन्दुस्तान)


इतना बड़ा झटका उन्हें जिंदगी में लगा था। वह सन्न रह गए थे। सुबह कुछ लोग दिलासा देने आए थे। लेकिन जितनी कोई दिलासा देता, उतना ही वह उखड़ जाते। ‘जब हमारे पास कहने को कुछ न हो, तो हमें जरूर चुप रहना चाहिए।’ यह मानना है डॉ. बिल गॉर्डन का। वह न्यूरोसाइंटिस्ट हैं, मॉडल…


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Updated: January 21, 2017 — 1:37 PM