सुधार से हिचके तो रुकेगा विकास (राष्ट्रीय सहारा)


अनुपम, नेता-स्वराज इंडिया उन्नीसवीं शताब्दी का अंतिम चरण कल-कारखानों के विकास का दौर था। उस कालखंड में ही ट्रेड यूनियनों का विकास हुआ। उस समय भी उद्योगपति अपने फायदे के लिए मजदूरों का शोषण करते थे। इसलिए, एक ऐसे संगठन की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो मजदूरों को उद्योगपतियों या प्रबंधन के शोषण…


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Updated: July 3, 2019 — 1:15 PM