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Saturday, March 13, 2021

किसान-सेहत की फिक्र (दैनिक ट्रिब्यून)

हरियाणा सरकार के पिछले बजट के लक्ष्यों पर जहां कोरोना संकट की छाया दिखी, वहीं आगामी बजट में कोरोना संकट काल में उपजी चुनौतियों से मुकाबला करने की चिंता नजर आई है। शुक्रवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वित्तमंत्री के रूप में अपना दूसरा बजट पेश किया। उन्होंने प्रदेश के विकास को गति देना ही बजट का लक्ष्य बताया। दरअसल, कोरोना संकट तथा लॉकडाउन से उपजी चुनौतियों के मुकाबले को बजट में प्राथमिकता दी गई है। इस बार सरकार ने 1,55,645 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो बीते साल के मुकाबले तेरह फीसदी अधिक है। इस बजट का एक-चौथाई हिस्सा पूंजीगत व्यय तथा तीन-चौथाई भाग राजस्व व्यय होगा। आगामी वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3.83 फीसदी रहने का अनुमान है। केंद्र सरकार के नये कृषि सुधारों के देशव्यापी विरोध के बीच स्वाभाविक रूप से सरकार के बजट के केंद्र में जहां किसान व कृषि रही है, वहीं स्वास्थ्य व शिक्षा उसकी प्राथमिकता बन गई है। इन क्षेत्रों को मजबूत बनाने के लिये जहां बजट बढ़ाया गया है वहीं मुकाबले के लिये नई रणनीति बनायी गई है। जाहिरा तौर पर कोरोना संकट, बेरोजगारी व महंगाई के दौर में किसी नये कर लगाने का अच्छा संदेश नहीं जाता, सो सरकार ने बजट में कोई नया कर लगाया भी नहीं। कोरोना संकट के चलते राज्य में प्रति व्यक्ति आय का घटना स्वाभाविक रूप से सरकार की चिंता में शामिल है। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान प्रतिबंध के चलते राज्य के राजस्व को बारह हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। देश में कोरोना संकट में बड़ा सामाजिक संत्रास देखने को मिला है, तभी बजट में समाज कल्याण के लिये भी पहल की गई है, जिसके अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन में 250 रुपये की वृद्धि, अनुसूचित जति के लोगों को दी जाने वाली कानूनी सहायता को दुगना करने तथा अंत्योदय उत्थान अभियान चलाने का भी निर्णय किया गया।


बजट पर पहली नजर से ही स्पष्ट होता है कि सरकार का लक्ष्य किसानों का विश्वास हासिल करना, महामारी से उपजे हालात में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तथा ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देना है। दरअसल, राज्य में इस साल होने वाले पंचायती राज्य संस्थाओं के चुनाव के मद्देनजर कृषि व किसान कल्याण और ग्रामीण विकास को तरजीह दी गई है। प्रदूषण मुक्त खेती योजना के तहत तीन साल के भीतर एक लाख एकड़ क्षेत्र को इसके अंतर्गत लाने, किसान मित्र योजना शुरू करने तथा प्रदेश में एक हजार किसान एटीएम लगाने की योजना है। महामारी ने सबक दिया है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ही एक मात्र समाधान हैं, जिसके चलते राज्य में साढ़े तीन सौ चिकित्सा अधिकारियों व साठ दंत चिकित्सकों के पद सृजित करने का फैसला किया गया है। एक हजार हेल्थ वेलनेस केंद्र खोले जायेंगे। साथ ही महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में एक कैंसर इंस्टीट्यूट बनाया जायेगा। आयुष सहायकों तथा आयुष कोच की अनुबंध के आधार पर भर्ती होगी। निजी क्षेत्रों में पचास हजार नौकरियां देने का वादा भी बजट में खट्टर सरकार ने किया है। शिक्षा भी खट्टर सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रही है। कोरोना संकट से मिले सबक के बाद सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लास रूम बनाने के लिये सात सौ करोड़ का प्रावधान सकारात्मक पहल है, जिसमें छात्रों के लिये टैबलेट उपलब्ध कराये जाएंगे। सरकार का दावा है कि राज्य में वर्ष 2025 तक नई शिक्षा नीति को क्रियान्वित कर लिया जायेगा। नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा देने का लक्ष्य रखा गया है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है जो संसाधनों के उपयोग और शिक्षा की बुनियाद मजबूत करने की दिशा में सार्थक कदम कहा जा सकता है। निस्संदेह गुरुग्राम व पिंजौर में फिल्मसिटी विकसित करने की योजना तथा हिसार, करनाल, पिंजौर और नारनौल के हवाई अड्डों पर नाइट लैंडिंग की व्यवस्था होने से जहां राज्य में नये रोजगारों का सृजन होगा, वहीं राज्य के पर्यटन उद्योग को भी सहारा मिलेगा। 

सौजन्य - दैनिक ट्रिब्यून।

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