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-Rajeev Kumar (Editor-in-chief)

Tuesday, February 2, 2021

आर्थिक बहाली का वाहक बनेगा यह बजट (बिजनेस स्टैंडर्ड)

मुकेश बुटानी 

जिस पृष्ठभूमि में यह बजट पेश किया गया है, उसे देखते हुए निर्मला सीतारमण को यह अनूठा अवसर मिला कि वह ऐसी चिंताओं के असर में आए बगैर इस मौके का भरपूर फायदा उठाती हुई नजर आ रही हैं।

सरकार की इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि महामारी के दौरान करों के संग्रह में आई कमी और राजस्व घाटे में हुई ऐतिहासिक वृद्धि के बावजूद उसने कॉर्पोरेट टैक्स एवं अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी करने की अपनी ललक पर लगाम लगाए रखी। इस पर आम सहमति थी कि अनुमानित कर संग्रह में आई भारी कमी की भरपाई के लिए एक नया कर या उपकर लगाना जरूरी है। हालांकि वित्त मंत्री ने राजस्व जुटाने के लिए कुछ दूसरे नवाचारी तरीके ईजाद किए हैं जिनमें जमीन की बिक्री एवं विनिवेश पर नए सिरे से जोर देना, अनुपालन बोझ को कम कर कारोबारों को फलने-फूलने वाला माहौल देना शामिल है। कर बोझ न बढ़ाने का फैसला भारतीय कंपनी जगत की धारणा को मजबूत करने और खपत एवं आर्थिक रिकवरी के नजरिये से अहम होगा।


इस बजट ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन का आगाज कर भौतिक, वित्तीय एवं पूंजीगत ढांचे पर मजबूती से जोर दिया है। परिसंपत्ति मुद्रीकरण की प्रगति जांचने के लिए एक समर्पित डैशबोर्ड के जरिये निवेशकों एवं रेटिंग एजेंसियों के बीच भरोसा पैदा किया जाएगा और गैर-कर राजस्व जुटाने के लिए सरकार की गंभीरता का भी अहसास होता है। मेट्रो, समर्पित मालढुलाई गलियारों, राजमार्गों एवं आर्थिक गलियारों के गठन समेत महत्त्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं के लिए विशेष फंड आवंटित किए जाने और इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाए जाने से अर्थव्यवस्था को मेक इन इंडिया की राह पर डाला जा सकेगा।


कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार के भागीदारों को समर्थन देते हुए एक स्थायी संस्थागत ढांचा बनाया जा रहा है जो तनावग्रस्त समय एवं इतर मौकों पर भी निवेश योग्य ऋण प्रतिभूतियों की खरीद करेगा अन्यथा तरलता में भारी वृद्धि होगी। ढांचागत ऋण फंड अब कर-सक्षम ढंग से ज़ीरो कूपन बॉन्ड जारी कर पाएंगे। छोटे कर्जदारों को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिकता बना हुआ है क्योंकि इसने सराफेसी कानून के तहत कर्ज वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के लिए न्यूनतम कर्ज सीमा को घटाकर 20 लाख रुपये कर दिया है।


बजट में निवेशक चार्टर लाने की बात कही गई है। यह चार्टर सेवा मानकों पर अमल को सुनिश्चित करने एवं अपेक्षाओं पर खरा उतरने से संबंधित मानक तय करने, तर्कसंगत बनाने एवं स्पष्टता लाएगा। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी करने की उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी कुछ सुरक्षा उपायों के साथ अधिसूचित किया जाएगा। बीमा कंपनी के बोर्ड एवं अहम प्रबंधकीय पदों में स्वतंत्रता बनाए रखने के उपाय किए जाएंगे।


बजट में फंसे कर्ज की बढ़ती समस्या से निपटने एवं तनावग्रस्त परिसंपत्ति के निपटारे के लिए परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी के गठन जैसे कुछ साहसिक प्रस्ताव भी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक पहले से ही तय नियामकीय ढांचे के तहत ऐसे बैड बैंक के प्रशासन में पहले अपना भरोसा जता चुका था। लेकिन बैंक एवं दूसरे देनदारों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि समुचित अनुपालन संस्कृति का पालन किया जाए और शुरुआती दौर में ही जोखिमों को चिह्नित कर लिया जाए ताकि कर्ज डूबने की यह समस्या फिर से न पैदा हो।


राजस्व जुटाने के नवाचारी तरीकों में गैर-प्रमुख सरकारी परिसंपत्तियों की बिक्री शामिल है जिसमें मुख्य रूप से सरकारी संस्थाओं की जमीन हैं। इनकी बिक्री के लिए विशेष उद्देश्य इकाई का गठन किया जाएगा। भारतीय जीवन बीमा निगम का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम लाने की जो घोषणा 2020 में ही की गई थी वह सरकार के लिए राजस्व जुटाने का सबसे बड़ा मौका हो सकती है। वित्त मंत्री ने नीति आयोग के सहयोग से रणनीतिक विनिवेश की कोशिशें नए सिरे से शुरू करने और घाटे में चल रही सार्वजनिक इकाइयों को बंद करने की बात कही है। ऐसे प्रयास किए जाने पर वृहद-आर्थिक संकेतकों में सुधार आएगा और राजस्व के लिए कर संग्रहों पर निर्भरता भी घटेगी।


समावेशी विकास की दिशा में अपना अभियान आगे बढ़ाने के क्रम में न्यूनतम मजदूरी का विस्तार एवं सभी श्रेणियों के कामगारों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम के दायरे में लाना निश्चित रूप से सराहनीय कदम है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के अंतर्गत विश्वविद्यालयों को मानक बनाना, मॉडल स्कूलों का विकास और राष्ट्रीय शिक्षा पर बाल शिक्षा ढांचे के निर्माण में अहम कदम साबित होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की लहर पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के जरिये कौशल, तकनीक एवं ज्ञान के हस्तांतरण को बढ़ावा देने वाले उपाय सराहनीय हैं। मुकदमेबाजी को कम करने के लिए वित्त मंत्री ने एक विवाद निपटान समिति के गठन की बात कही है जिसे छोटे करदाताओं के विवादों को दूर करने का जिम्मा दिया जाएगा। व्यक्तिगत संपर्क की जरूरत खत्म करने वाली पहचान-रहित कर आकलन योजना का प्रयोग सफल रहने से उत्साहित वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय फेसलेस आयकर अपील पंचाट केंद्र बनाने की घोषणा की है जहां पर सभी कार्य-व्यवहार इलेक्ट्रॉनिक ढंग से ही किए जाएंगे। इससे भारत फेसलेस आकलन एवं अपील के मामले में अग्रणी देशों की कतार में शामिल हो जाएगा जो अन्य अदालतों एवं पंचाटों के लिए भी एक नजीर साबित होगा। सरकार ने जीएसटी एवं आयकर दोनों देने वाले करदाताओं पर ऑडिट एवं अनुपालन बोझ घटाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। भारत को उच्च वृद्धि पथ पर लाने के सपने पूरे हो पाए हैं क्योंकि सरकार ने महामारी की वजह से हुए अभूतपूर्व आर्थिक संकुचन को देखते हुए अपने पूंजीगत व्यय आवंटन में 34 फीसदी की भारी वृद्धि की है। वित्त मंत्री ने एक संतुलित बजट पेश किया है। यह एक ऐसा बजट है जो सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रिकवरी की प्रक्रिया न्यूनतम गतिरोध के साथ बरकरार रहे।


(लेखक बीएमआर लीगल के पार्टनर हैं। इसमें फर्म के प्रमुख सहयोगी शैंकी अग्रवाल एवं वरिष्ठ सहयोगी मधुरा भट का भी योगदान है। लेख में व्यक्त विचार निजी हैं)

सौजन्य - बिजनेस स्टैंडर्ड।

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