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Saturday, February 6, 2021

आने को है रुपहले परदे पर बहार (हिन्दुस्तान)

जयंती रंगनाथन, कार्यकारी संपादक, हिन्दुस्तान 

पिछले साल 20 मार्च को नोएडा के एक मल्टीप्लेक्स में देर शाम के शो में नई रिलीज हुई इंग्लिश मीडियम  देखने मुट्ठी भर दर्शक पहुंचे थे। दुनिया में कोविड महामारी पैर पसारने लगी थी। हमारे यहां भी सब सजग हो रहे थे। मैं भी पशोपेश में थी, लेकिन इरफान खान को बड़े परदे पर देखने का लोभ संवरण नहीं कर पाई। फिल्म देखकर खाली सिनेमा हॉल से निकलते समय अजीब सा एहसास हुआ, इतना सन्नाटा पहले तो कभी नहीं था। उस वक्त यह अंदाज नहीं था कि इंग्लिश मीडियम के बाद लंबे  समय तक कोई और फिल्म थियेटर में रिलीज नहीं होगी। हम जैसे फिल्मों के शौकीन जो हर सप्ताह किसी नई और अच्छी फिल्म का इंतजार करते हैं, उनके लिए टीवी, लैपटॉप या टैबलेट का कुछ इंची परदा एक समझौते की तरह है। यह सच है कि लगभग पूरे साल ओटीटी प्लेटफॉर्म ने मनोरंजन का भरपूर डोज दिया, पर क्या इससे वह संतुष्टि मिली, जो बडे़ परदे पर एक शाहकार फिल्म देखने के बाद होती है? नहीं, कतई नहीं। दोनों अनुभव अलग-अलग हैं। रुपहले परदे के जादू का कोई विकल्प नहीं है।

अक्तूबर में सरकार ने सशर्त पचास प्रतिशत क्षमता के साथ फिल्म थियेटर खोलने की अनुमति दे दी थी। उस समय हमारे देश में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़ रही थी। साल 2020 की बड़ी फिल्में सूर्यवंशी  और 83 के प्रदर्शन की तारीखें लगातार टल रही थीं। जाहिर था कि निर्माता इन बड़ी फिल्मों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहते थे। साल के अंत में जो फिल्में थियेटर में आईं भी, वे छोटी फिल्में थीं। साथ ही, वे तुरंत ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी आ गईं। थियेटर में फिल्म देखने बेहद कम लोग पहुंचे। फरवरी की पहली तारीख से सरकार ने देश भर में फिल्म थियेटरों को पूरी तरह से खोलने का निर्णय लिया है। अप्रैल की दो तारीख को साल की सबसे बड़ी फिल्म सूर्यवंशी रिलीज होने जा रही है। अक्षय कुमार की यह फिल्म पिछले साल से रुपहले परदे पर आने का मुंह ताक रही है। हालांकि, यह फिल्म साल की दूसरी तिमाही में आएगी, पर माना जा रहा है कि इस फिल्म के साथ दर्शक थियेटरों में दोबारा लौटेंगे। देश में कोरोना के मरीजों की घटती संख्या, टीकाकरण आदि की खबरों की वजह से भी एक सकारात्मक माहौल बन रहा है। हम हिन्दुस्तानियों के डीएनए में क्रिकेट और फिल्में रची-बसी हैं। हम इनसे ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह सकते। ट्रेड पंडित और फिल्म क्रिटिक जोगेंदर टुटेजा कहते हैं, ‘पिछले साल इंडस्ट्री को लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अगर इस साल स्थिति सुधरेगी, तब भी हम लगभग दो हजार करोड़ रुपये के नुकसान में रहेंगे।’ इंडस्ट्री से जुड़े एक्जीबीटर, विश्लेषकों और निर्माताओं का मानना है कि दर्शक फिल्म थियेटर में वापस आने को बेताब हैं। आप पहले की तरह उन्हें बड़ी फिल्में दीजिए, वही माहौल दीजिए। पिछले महीने दक्षिण भारत में दो बड़ी फिल्में मास्टर  और क्रेक  बड़े परदे पर आईं। मास्टर  ने महज एक सप्ताह में 175 करोड़ रुपये की कमाई कर ली। थियेटरों में पचास प्रतिशत दर्शकों के बावजूद ये आंकड़े संतोषजनक रहे, लेकिन फिल्म रिलीज होने के मात्र 16 दिन बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई। इस वजह से थियेटर में दर्शकों की संख्या पर असर पड़ गया। इस समय बॉलीवुड भी इस विवाद में उलझा हुआ है कि थियेटर में आने के बाद कम से कम छह सप्ताह बाद ही ओटीटी पर फिल्में आनी चाहिए, ताकि निर्माता, फाइनेंसर और थियेटर मालिकों को भी मुनाफा मिल सके। सूर्यवंशी  के साथ भी यह दिक्कत सामने आ रही है। इस फिल्म की रिलीज को साल भर टालने की वजह से फिल्म की कीमत में पंद्रह से बीस प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। अगर इसके साथ यह डर या भ्रम बना रहे कि रिलीज के चंद सप्ताह बाद ही फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आ जाएगी, तो इससे सिनेमा हॉल वाली सफलता पर काफी असर पड़ सकता है।

पिछले साल बॉलीवुड की कमाई न्यूनतम रही और नुकसान तगड़ा हुआ। संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई  और बोनी कपूर की फिल्म मैदान  का करोड़ों का सेट बनकर तैयार था, लेकिन कोविड की वजह से शूटिंग को रोक दिया गया। लॉकडाउन का समय बढ़ता गया, दोनों फिल्मों के आलीशान सेट को ढहा देना पड़ा। शूटिंग शुरू होने के बाद दोबारा ये दोनों सेट बने। इससे फिल्म का बजट भी बढ़ गया और इंडस्ट्री को होने वाले नुकसान का आंकड़ा भी। इस तरह के बहुत उदाहरण हैं। बॉलीवुड ट्रेड विशेषज्ञ कोमल नाहटा की मानें, तो अगर हम पिछले साल से लेकर आने वाले कुछ साल तक फिल्म उद्योग के नुकसान का आकलन करें, तो यह नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का बैठेगा। हमारे पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं है कि हम बड़ी और अच्छी फिल्में बनाएं और दर्शकों को बड़े परदे पर लौटने की दावत दें। पिछले साल बॉलीवुड को जो तगड़ा नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आने वाले दो सालों तक नहीं हो सकती। बॉलीवुड छह साल पीछे चला गया है। इस उद्योग से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। इस साल अप्रैल के बाद मई में ईद के समय सलमान खान की फिल्म राधे : युअर मोस्ट वांटेड भाई  आएगी। उसी दौरान जॉन अब्राहम की देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्म सत्यमेव जयते 2 भी रिलीज होगी। जून में रनवीर सिंह की बहुप्रतीक्षित खेल फिल्म 83 आएगी। 13 अक्तूबर को उत्सवों का आगाज करेंगी बाहुबली के निर्देशक राजमौली की त्रिभाषी फिल्म आरआरआर  और बोनी कपूर की बड़ी फिल्म मैदान। नवरात्र और दिवाली का वक्त किसी भी फिल्म की रिलीज के लिए फायदेमंद होता है, इसलिए उस सप्ताह अगर दो बड़ी फिल्में भी आएंगी, तो उन्हें दर्शकों की कमी नहीं होगी। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में आमिर खान अपनी फिल्म लाल सिंह चड्डा  लेकर आ रहे हैं। गौरतलब है कि सिर्फ इस साल के ही नहीं, अगले साल के भी सभी महत्वपूर्ण दिन जैसे वेलेंटाइन, होली, गरमी की छुट्टियां, ईद, दिवाली और क्रिसमस पर बड़ी फिल्मों ने अभी से अपने नाम की मुहर लगा दी है।

सौजन्य - हिन्दुस्तान।

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