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Saturday, January 23, 2021

ट्विटर को क्यों रोक लगानी चाहिए ईरान के सर्वोच्च नेता के अकाउंट पर ? (पत्रिका)

मसीह अलीनेजाद (ईरानी पत्रकार, वॉइस ऑफ अमेरिका की पर्शियन सेवा के लिए टॉक शो 'टैब्लिट' का संचालन करती हैं।)

यूएस कैपिटल पर 6 जनवरी को हमले के चलते ट्विटर और फेसबुक ने पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के अकाउंट अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर निलंबित कर दिए - शुरुआत में अस्थायी तौर पर। बाद में फेसबुक ने कहा कि इसका प्रतिबंध अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा, जबकि ट्विटर ने प्रतिबंध को स्थायी करार दे दिया। अपने कदम के लिए ट्विटर ने वजह बताई - 'और हिंसा भड़कने का खतरा।' कितने ही ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अक्सर इस बात पर आश्चर्यचकित होते हैं कि इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई और अन्य सरकारी अधिकारियों ने 8 करोड़ 30 लाख ईरानी लोगों को ट्विटर पर प्रतिबंधित किया, जबकि वे खुद अपने झूठ का प्रचार करने के लिए लगातार सोशल प्लेटफॉर्म का पूरा इस्तेमाल करते आ रहे हैं - और वह भी बिना किसी चेतावनी के।

इस बात से तो यही कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया के मंच का रुख तानाशाहों के पक्ष में झुका हुआ रहता है। बीते अक्टूबर माह के दौरान सीनेट के सामने पेश हुए ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने कहा था कि खामनेई के यहूदी-विरोधी ट्वीट और इजरायल का नामोनिशान मिटाने के नारों से कंपनी के नियमों का उल्लंघन इसलिए नहीं होता क्योंकि ये 'कोरी धमकियां मात्र' हैं। डोर्सी ने दावा किया क्योंकि खामनेई के जुबानी हमले अपने नागरिकों के खिलाफ नहीं हैं, इसलिए वे स्वीकार्य हैं। यह कोरा झूठ है और इसमें दूरदर्शिता का अभाव है। नवंबर 2019 के विरोध प्रदर्शन इसका उदाहरण हैं, जब शासन ने कम से कम एक सप्ताह के लिए इंटरनेट बंद कर दिया था। इंटरनेट बहाल होने पर सामने आए वीडियो दिल दहला देने वाले थे।

अमरीकी नागरिकों को जिस तरह की लोकतांत्रिक संस्थाएं सुलभ हैं, ईरानी नागरिकों के लिए उनका अभाव है और उनके लिए सोशल मीडिया का मंच ही अपनी बात कहने का उपकरण है। अब समय आ गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां तानाशाहों को नफरत फैलाने के लिए इन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने से रोकें।

- द वॉशिंग्टन पोस्ट

सौजन्य - पत्रिका।
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