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अब चीन से साइबर अटैक का खतरा : Punjab Kesri Editorial

दुनिया भर में इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी की तरक्की ने हमारा जीवन बहुत आसान बना दिया है परंतु इसका दुरुपयोग भी खूब होने लगा है। चूंकि आज सारा काम इंटरनैट और कम्प्यूटरों पर हो रहा है तो हैकर्स से अपने संवेदनशील तथा गोपनीय डाटा


दुनिया भर में इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी की तरक्की ने हमारा जीवन बहुत आसान बना दिया है परंतु इसका दुरुपयोग भी खूब होने लगा है। चूंकि आज सारा काम इंटरनैट और कम्प्यूटरों पर हो रहा है तो हैकर्स से अपने संवेदनशील तथा गोपनीय डाटा की सुरक्षा करना भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में अमेरिका में सान फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के कम्प्यूटर सिस्टम्स को हैक करने के बाद डाटा लौटाने के लिए हैकर्स ने 1.14 मिलियन डॉलर की फिरौती वसूल की। दूसरी ओर ब्रिटेन की खुफिया एजैंसियां भी चीन सहित अन्य विरोधी देशों की ओर से यू.के. की रिसर्च लैब्स पर हो रहे साइबर अटैक्स को रोकने के लिए अलर्ट हैं। इन लैब्स में कोरोना की दवाई बनाने पर काम चल रहा है।  

साइबर अटैक का खतरा अब भारत पर भी मंडरा रहा है। हाल ही में 59 चाइनीज एप्स को भारत की ओर से बैन करने के बाद से ही चीन की ओर से साइबर अटैक की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सरकार उन सैक्टर्स और कम्पनियों की खास तौर से निगरानी कर रही है जिनमें चीन की ओर से निवेश किया गया है। 

ऐसे सैक्टर्स में कम्युनिकेशन और पावर के अलावा फाइनांशियल सैक्टर तक शामिल हैं। साइबर जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि एप्स को बैन करना केवल एक शुरूआत है और इससे भड़का चीन बदले में भारतीय साइबर स्पेस को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है। कुछ अधिकारियों के अनुसार लगभग सभी सैक्टर्स में पहले से बेहतर निगरानी की जा रही है। इसके अलावा पावर, टैलीकॉम और फाइनांशियल सर्विसेज से जुड़े सैक्टर्स का चाइनीज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ाव होने के चलते उन्हें भी अलर्ट पर रखा गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘कई वर्षों से हमने चीन को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की अनुमति दे रखी थी, ऐसे में उन नैटवक्र्स तक चीन की पहुंच है। इनमें कम्युनिकेशंस, पावर के अलावा फाइनांशियल सैक्टर भी शामिल हैं।’’

खतरा इस बात का है कि रिमोट लोकेशन्स से चीन भारत के इन नैटवक्र्स पर साइबर अटैक कर सकता है, इसे लेकर सभी संबंधितों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार सरकार उन कम्पनियों पर फोकस करेगी जिनमें चाइनीज निवेशकों की ओर से फंडिंग की गई है और इनकी निगरानी और सर्विलान्स अलग-अलग स्तर पर किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट सैक्टर में इस्तेमाल किए जा रहे चीन में बने सर्विलांस डिवाइसेस पर भी नजर रखी जा रही है। एक विशेषज्ञ के अनुसार मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कोई भी देश सीमा पर युद्ध के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में साइबर स्पेस, ट्रेड और सप्लाई चेन को प्रभावित कर नुक्सान पहुंचाने की कोशिश जरूर की जा सकती है। चीन की ओर से फंडिंग पाने वाली कम्पनियों और खासकर टैक फम्र्स की अब निगरानी की जा रही है क्योंकि इन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। 

पहले भी चाइनीज हैकर्स से जुड़ी चेतावनी सरकार की ओर से दी जा चुकी है और चीन की ओर से पहले भी डाटा पाने के लिए अटैक किए जाते रहे हैं और पिछले साल लाखों भारतीयों का मैडीकल डाटा चोरी होने का मामला सामने आया था। पिछले कुछ दिनों की ही बात करें तो चीन की ओर से साइबर अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। गत माह ही महाराष्ट्र के साइबर विभाग ने एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी थी कि चीन के साइबर अपराधी बड़े स्तर पर फिशिंग हमले की योजना बना रहे हैं। राज्य साइबर विभाग के स्पैशल आई.जी. ने कहा था कि 4-5 दिनों में ही भारत के साइबर स्पेस पर संसाधन, जो खासकर सूचना, इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग से जुड़े हैं, उन पर चीन से हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया था कि कम से कम ऐसे 40,300 साइबर हमलों की कोशिश हुई जिसमें से अधिकतर की ट्रेसिंग चीन के चेंगदू क्षेत्र में हुई है। 

ऐसे में बेहद जरूरी है कि इंटरनैट के सुरक्षित उपयोग के बारे में सभी संबंधित लोगों को जागरूक किया जाए। जैसे कि सोशल मीडिया पर किसी अनचाहे ईमेल, एस.एम.एस. या मैसेज में दिए अटैचमैंट को खोलने या क्लिक करने से बचें। ईमेल, वैबसाइट में वर्तनी की गलती और अज्ञात ईमेल भेजने वालों से भी सावधान रहें। इन दिनों ऐसे ई-मेल या लिंक से विशेष रूप से सावधान रहें जो खास ऑफर के साथ हों जैसे कोविड-19 टेस्टिंग, कोविड-19 मदद, ईनामी राशि, कैशबैक ऑफर्स आदि। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या लॉगइन करने से पहले उसके यू.आर.एल. को अवश्य चैक कर लें।

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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