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कोविड से जंग में गैर संचारी रोग भी चुनौती : Amar Ujala Editorial

मोनिका अरोड़ा
गैर-संचारी रोग किसी संक्रामक वायरस के कारण नहीं होते, बल्कि ये पुराने रोग होते हैं, जो आनुवांशिक, शारीरिक, पर्यावरणीय और व्यवहारिक कारकों के चलते होते हैं। भारत में ये रोग देश की कुल वार्षिक मृत्युदर में लगभग 63 फीसदी (58.7 लाख) का योगदान करते हैं।

इनमें से अधिकांश मौतें समय से पहले (30 से 70 वर्ष की उम्र) और जीवन के सबसे उत्पादक वर्षों में होती हैं। चार मुख्य गैर संचारी रोग-हृदय रोग, पुरानी सांस की बीमारी, कैंसर और डायबिटीज हैं। भारत में उच्च रक्तचाप से 25.7 करोड़ और डायबिटीज से 7.7 करोड़ लोग ग्रस्त हैं।
हर वर्ष बीस लाख लोगों की मौत हृदय रोग से संबंधित कारणों से होती है। भारत में ग्यारह वयस्कों में से एक (उम्र 20-79) मधुमेह का इलाज कराते हैं और 4.39 करोड़ लोगों के बारे में अनुमान है कि उनका इलाज नहीं हो पाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही कैंसर, मधुमेह और हृदय रोग और स्ट्रोक के रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम चला रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, बुनियादी ढांचा स्थापित करना और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर ही स्क्रीनिंग करना है।

गैर-संचारी रोगों का बोझ कोविड-19 से निपटने में भारी चुनौती पैदा कर रहा है। मौजूदा सबूत बताते हैं कि गैर-संचारी रोगों के साथ जीने वाले लोगों (पीएलडब्ल्यूएनसीडी) के कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार होने या मरने का खतरा ज्यादा होता है।

उच्च मृत्यु दर वाले कई देशों ने बताया है कि कोविड से सबसे ज्यादा मौंतें बुजुर्गों और उन लोगों की हुई हैं, जो डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसे एक या एक से अधिक रोगों से पीड़ित थे। जून के अंत तक, भारत में पांच लाख से अधिक कोविड-19 के मामले थे और इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मामले सह-रुग्णता के कारण थे।

कोरोना काल से पहले भी जागरूकता की कमी और  स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच की कमी के चलते गैर संचारी रोगों से पीड़ित लोग इलाज से वंचित थे। कोविड -19 के बढ़ते बोझ ने गैर संचारी रोगों से पीड़ित लोगों की स्थिति को कमजोर बना दिया है, क्योंकि जिन लोगों में गैर-संचारी रोगों की पुष्टि हो चुकी थी, उनमें से भी ज्यादातर को महामारी के दौरान बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं।

हालांकि लॉकडाउन को समाप्त करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन गैर-संचारी रोगों से पीड़ितों की स्थिति में तब तक सुधार नहीं हो सकता, जब तक कि उन्हें पहचानने और उनकी सुरक्षा करने के लिए अभिनव समाधान नहीं मिलते।

लॉकडाउन के दौरान, दुनिया भर में गैर-संचारी रोगों से पीड़ितों को अपने इलाज में असंख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ज्यादातर स्वास्थ्य प्रणालियों को पुनर्गठित किया गया है और गैर-संचारी रोगों से पीड़ित उनकी प्राथमिकता में नहीं थे।

ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि पुराने रोगियों के इलाज, जरूरी दवाओं एवं प्रौद्योगिकियों की आपूर्ति व स्क्रीनिंग एवं उपचार में रुकावट के साथ-साथ गैर-संचारी रोगों के इलाज में सहायक स्वास्थकर्मियों तक पहुंच  में भी बाधा हुई। भारत में लॉकडाउन के दौरान, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की अनुपलब्धता के साथ-साथ कई स्वास्थ्य सुविधाओं के बंद होने के कारण भारत में स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं बाधित हुईं।

बेशक भारत में कोविड-19 के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, पर भारत में कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर (रिकवरी रेट) 25 मई को  41.4 फीसदी थी (अब यह दर 60 फीसदी हो चुकी है)। मध्य अप्रैल में केरल में मृत्यु दर 0.5 फीसदी थी, जो विश्व में सबसे न्यूनतम थी।

केरल की रिकवरी रेट भी उत्साहित करने वाली थी। इसका कारण था कि केरल ने स्वास्थ्य निगरानी का अभियान चलाया था-कमजोर बुजुर्गों, सह-रुग्णता वाले लोगों, और कम वजन वाले व कुपोषित बच्चों पर कड़ी निगरानी रखी गई और गैर-संचारी रोगों के पीड़ितों को उनके दरवाजे पर एक महीने की दवा की आपूर्ति की गई।

ऐसा विभिन्न क्षेत्रों और विभिन्न लोगों के सहयोग से किया गया। उसी समय पड़ोसी राज्य कर्नाटक ने 4.3 प्रतिशत की मृत्यु दर दर्ज की और इसका कारण यह था कि सह-रुग्नता वाले रोगियों की पहचान नहीं की गई और उन्हें तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचाया गया।

कोविड-19 से जंग, जिनमें लॉकडाउन, शारीरिक दूरी और आत्म-अलगाव शामिल हैं, के दौरान शारीरिक गतिविधियों में बाधा और अस्वास्थ्यकर भोजन के चलते गैर-संचारी रोगों के कारकों,जैसे शराब और तंबाकू का उपयोग बढ़ने के जोखिम हैं।

यह वर्तमान में स्वस्थ आबादी को इन आदतों का लती होने की एक नई चुनौती पेश करेगा, और बाद में वे गैर-संचारी रोगों का सामना कर सकते हैं। महामारी की शुरुआत में, डब्लूएचओ ने लोगों को स्वस्थ रहने और तंबाकू का उपयोग छोड़कर अपनी प्रतिरक्षा में सुधार करने की सलाह दी।

अप्रैल में आईसीएमआर ने भी लोगों को तंबाकू का उपयोग न करने और सार्वजनिक स्थलों पर न थूकने की सलाह दी थी। सरकार ने बाद में कोविड-19 प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय निर्देश के तहत सभी धूम्रपान और धूम्रपान रहित तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां अब सरकारों से यह सुनिश्चित करने की अपील कर रही हैं कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय कोविड-19 रोकथाम योजनाओं में गैर-संचारी रोगों को भी शामिल किया जाए। जैसा कि हम सभी अगले कुछ वर्षों के लिए कोविड-19 के साथ रहने की तैयारी कर रहे हैं, हमें गैर-संचारी रोगों से पीड़ित कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास करने और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। एक मजबूत, लचीली, योग्य, अच्छे स्वास्थ्यकर्मी से युक्त स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली और स्वस्थ आबादी मौजूदा वक्त की जरूरत है। (लेखिका पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के हेल्थ प्रोमोशन डिविजन में प्रोफेसर और निदेशक हैं।)

सौजन्य - अमर उजाला।

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